रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए यदि आप भी पी रहे हैं काढ़ा तो हो जाएं सावधान

कोरोना महामारी के दौरान यदि आप भी रोग प्रतिरोशक क्षमता बढाने के लिए काढ़ा पी रहे हैं तो जरा सावधान हो जाईये। काढ़ा पीने के फायदे के साथ नुकसान भी होते हैं। यदि आप काढ़ा सही मात्रा में या फिर तासीर के हिसाब से नहीं पी रहे हैं, तो नाक से खून आना, छाले, पेट में गर्मी बढ़ने से जलन, पेशाब में जलन जैसी गई गम्भीर बीमारियां हो सकती हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ राज्यों में त्रिकुट काढ़ा (सोंठ+कालीमिर्च+लेडी पीपल) फ्री में बांटा जा रहा है और कुछ लोग पंचकोल या फिर ज्यादा औषधि मिलाकर काढ़ा बना रहे हैं। लेकिन काढ़े के बारे में जानकारी का ध्यान रखें बिना लोग बेहिसाब काढ़ा पिए जा रहे हैं। जिसका नतीजा नुकसान के रूप में निकलकर सामने आ रहा है।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की डायरेक्टर चिकित्सक तनुजा नेसारी का कहना है कि गर्म तासीर वालों को काढ़ा पीने से नाक में खून आना, पेशाब में जलन होना, पेट में जलन होना जैसी बीमारियों हो सकती हैं।

इसलिए आप आयुष मंत्रालय द्वारा बताए गए काढ़े का उपयोग करें क्योंकि उसको एक खास मात्रा का विशेष ध्यान रखकर बनाया गया है। काढ़ा बनाते समय ठीक मात्रा का ध्यान रखें। यदि काढ़े की तासीर को ठंडा करना है तो सोंठ, काली मिर्च कम कर दें व इलाइची, गिलोय, मुलेठी डाल दें।

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बता दें कि इसी तरह त्रिकुट काढ़ा पी रहे हैं तो केवल एक चुटकी भर लें। इसमें मुलेठी, गिलोय, मुनक्का डालकर काढ़े की तासीर को ठंडा करें। ऐसा करने से आपको कोई समस्याएं नहीं होंगी।

वहीं आयुर्वेदाचार्य और पूर्व चीफ मेडिकल अधिकारी दिल्ली अस्पताल चिकित्सक डीएम त्रिपाठी का कहना है कि हमारे पास ऐसे लोग आ रहे हैं, जिनको काढ़ा पीने के बाद समस्याएं हो गई है। जिन लोगों की तासीर पित्त वाली है उनको काढ़ा पीने से समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए ऐसे में काढ़े का कॉन्सेंट्रेशन कम रखना चाहिए और मात्रा भी कम करनी चाहिए। इसके अलावा काढ़े को कम देर तक उबालना चाहिए। पित्त बढ़ने से छाले या जलन की समस्या हो जाती है। इसीलिए आप पित्त की तासीर वाले काढ़े में गिलोय, मुलेठी मिला सकते हैं।

 

कफ प्रकृति वाले थोड़ा ज्यादा भी पी लें तो कोई बात नहीं क्योंकि ये त्रिकुट औषधि कफ को मिटाती है। लेकिन वात व पित्त वालों को ध्यान रखना चाहिए। त्रिकुट काढ़ा एक आदमी को 5 ग्राम से ज्यादा नहीं लेना चाहिए।

काढ़ा बनाते वक्त बर्तन में जितना भी पानी लें, उसका एक चौथाई पानी जब उबालने के बाद बच जाए तब काढ़ा आप बिना किसी चिंता के पी सकते हैं। यदि आपको फिर भी समस्या हो रही है, तो काढ़े को व कम मात्रा में लीजिए।

इसके अलावा यदि किसी को छाले हो जाएं तो पान का पत्ता चबाएं, बड़ी इलाइची खा लें इसके साथ ही आप छाछ भी पी सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ लोग घर में पंचकोल काढ़ा या 9 प्रकार की जड़ी-बूटी मिलाकर काढ़ा बना रहे हैं।

जबकि होने कि सम्भावना है कि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं हो। इसीलिए तासीर के हिसाब से मौसम के तापमान को देखते हुए काढ़ा पी सकते हैं। कोरोना से लड़ाई शुरु होते ही आयुष मंत्रालय ने भी काढ़ा पीने की बात की लेकिन ये भी बोला है कि ये कोई दवाई नहीं है।

बल्कि प्रीवेंटिव के तौर पर है इसे आप अपनी इच्छानुसार पी सकते हैं। हालांकि काढ़ा पीने वाले इसके अच्छे असर भी बता रहे हैं। लेकिन जो लोग काढ़े की मात्रा व कितनी बार लेना है, इस बात का ध्यान नहीं रख रहे उनको विभिन्न प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।

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